Category: कविताएं

  • श्रीराम जन्मोत्सव

    श्रीराम जन्मोत्सव

    श्रीरामनवमी की समस्त जनों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ। आज अवतरित हुए है राम, धन्य धरा और धन्य अयोध्या धाम. लेकर तेरा नाम राम है ऋषि मुनियों ने जीवन संसार सँवारा. धन्य हुई है धरती अयोध्या, जिसके कण कण में श्रीराम बसे है. परम पुनीत सलिला सरयू, घाट है जिसके उज्जवल हुए है. आज का…

  • फ़रिश्ते जमीं पर हैं

    फ़रिश्ते जमीं पर हैं

    ये साजिश है या कि कुदरत का कहर है सांसे थम रहीं सुना कि हवाओं में ज़हर है इस सदी के इंसां ने कुदरत को यूँ छेडा आलम ये कि आदमी बंद घर के अंदर है उसकी भी सोचिए जिसकी बेबसी का सफ़र है भूख है प्यास है और मीलों दूर घर है जिंदगी की…

  • हाँ! हम राम के वंशज है

    हाँ! हम राम के वंशज है

    मर्यादा का कीर्तिमान राम से है। त्याग का अमिट उदाहरण राम से है।। मैं कैसे न गर्व करूँ। मैं वंशज हूँ राम का, जीवन का हर सत्य राम से है। संयम की असीम कथा राम से है। प्रेम की अमिट व्यथा भी राम से है।। मैं कैसे न गर्व करूँ। मैं वंशज हूँ राम का,…

  • देश पर अभिमान है

    देश पर अभिमान है

    मुझे भी अपने देश पर अभिमान है। कलमकार डॉ. कन्हैया लाल गुप्त जी यह कविता आपके हृदय एक सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित कर देगी। मुझे अपने देश पर अभिमान है मै भारतीय हूँ इसका मुझे गर्व है भारत मेरी माता है इसका गर्व है। इसकी गोद मे पला हूँ, इसका अभिमान है मुझे। इसके अमृत समान…

  • अनदेखी

    अनदेखी

    कलमकार राज शर्मा की कविता ‘अनदेखी’ पढ़ें। हम बहुत सारी आवश्यक बातों की अनदेखी कर दिया करते हैं, मनुष्य के इस स्वभाव को कविता में संबोधित किया गया है। बात बात पे मिथ्या बोलना, सबका यही स्वभाव । नकाब को आगे करके, एक सा देते सब जबाब।। काम निकाले हर कोई, पाछे का सब भूल…

  • अप्रैल फूल नहीं मनाना भाई

    अप्रैल फूल नहीं मनाना भाई

    सदियों से मनाते आएहो, सभी अप्रैल फूलइस बार नहीं मानना भाई, कारण कोरोना शूल इस बार तिलांजलिदे दो, मूर्ख दिवस कीदुआ में बैठो, करो प्रार्थना, यही है बस की हाल को जानो, चाल को जानो, नही बुलाओ बबूल अपनों से दूर हुए, जिसके कारण, हम फ़लक परकभी आसमां सा बैठे थे, अपनों के हम पलक…

  • अप्रैल फूल

    अप्रैल फूल

    हुआ यूँ, ‘अप्रैल’ में एक ‘फूल’ मिला,संग उसके इसके एक शूल मिला।आगाज़ किया उसने मोहब्बत का,ज़माने भर का है उसूल मिला।।अप्रैल में एक फूल मिला… उनकी बातें थी कोंपले जैसी,लहज़ा उनका कड़क तने जैसी।प्यार किया अटूट मैंने, भटक रहा दर-बदर,सिला तो जरूर मिला।अप्रैल में एक फूल मिला… बता दो हमें ये कि, दिल को क्यों…

  • कोरोना की मार से

    कोरोना की मार से

    सिसक रहे हैं सपनें सबकेआज के हालात सेबेबस जीवन हुआ आज हैकोरोना की मार से..।। आज और कल की चिंता मेंव्यथित हुआ मानव जीवनहुए पलायन को बेबस सबबेकारी की मार से..।। पेट और रोटी का रिश्ताअब कैसे निभ पाएगाभरण और पोषण कैसे होबीमारी की मार से..।। मुरझाए चेहरे से अब तोखुशियां सारी दूर हुईंजीवनयापन मुश्किल…

  • डॉक्टर- धरती पर भगवान

    डॉक्टर- धरती पर भगवान

    मानव कंपित, दुखी बहुत आज हुआ वो खस्ताहाल, मंदिर मस्जिद बंद हो गए काम आ रहे हैं अस्पताल। हां मैं भी एक उपासक हूं मानता हूं प्रभु का कमाल, डॉक्टर उसकी श्रेष्ठ रचना, काम कर रहे हैं बेमिसाल। मंदिर का ईश्वर संबल देता डॉक्टर पहना रहे जयमाल, स्वस्थ होकर घर आते बच्चे मांए चूम रही…

  • छोटा सा कोरोना

    छोटा सा कोरोना

    सहमी सी सुबह है, सूनी-सूनी शाम है गतिमान समय में, कैसा ये विराम है। दरवाजे बंद,नहीं खुलती हैं खिड़कियां सन्नाटा बोलता है, चुप-चुप हैं तितलियाँ। दौर कैसा आया, डरे-डरे शहर , ग्राम हैं सहमी सी सुबह है, सूनी -सूनी शाम है। लगता था बहुत बड़ा अपना, विज्ञान है संचित है कोष बड़ा, विश्वव्यापी ज्ञान है।…

  • फिक्र तो तुम्हे करने की जरूरत है मनुष्य

    फिक्र तो तुम्हे करने की जरूरत है मनुष्य

    वबा ने रौंद डाली है खिलखिलाती खुशियों को और बेढ़ब सी पसर गई है मुस्कुराती दुनिया ख़लक को बनाने वाले को क्या है मंज़ूर? किसी को आसमां भर दिया है किसी को फलक भर भी नहीं कोई हंसी के यथार्थ में अपना वक्त गुज़ार रहा है तो कोई सिसकते आंसुओं में रोए जा रहा है…

  • लक्ष्मण रेखा

    लक्ष्मण रेखा

    घर की दहलीज अपनीहम सबको प्यारी हैफिर क्यों न रहे घरक्यों उल्लंघन करे हमलक्ष्मण रेखा कारोग को न्यौता देनेक्यों निकले सड़को परलोक डाउन का मतलबअपने घर पर होगीखुद की सुरक्षाआओ अभी करें संकल्पऔर ले संयम से कामकोरोना से लड़ने केदो हथियार हैसंकल्प व संयमहमेशा याद रखें ~ डॉ. राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”

  • महागौरी वंदन- अष्टम दिवस

    महागौरी वंदन- अष्टम दिवस

    पूजा अर्चना उपासना से माँ अलौकिक सिद्धियां देती है गौरवर्ण में शोभित दिव्य रूप माता महागौरी कहलाती है अष्ठम दिवस पर करें आराधना माँ गौरी ही फल देती है बृषभ सवारी करती है माँ वृषारुढा भी कहलाती है श्वेत वस्त्र श्वेत आभूषण पहन श्वेताम्बर धरा भी कहलाती है आयु केवल आठ वर्ष है माँ की…

  • शेरावाली के नवरात्रे

    शेरावाली के नवरात्रे

    माता भवानी के पावन नवरात्रे। मन में भक्ति की जोत जगा ले।। किए थे सृजन इस दिन विधाता झोलियां भर दे हे माँ शैलसुता।। तरुवर सुवासित पुष्पों से श्रृंगार। दूर करो माता मन का अंधकार।। व्याधि जग की दूर कर भवानी। दया करो हे भगवती माता रानी।। करे मन से जो तेरा पावन पूजन ।…

  • कोरोना से लड़ना है

    कोरोना से लड़ना है

    ये सड़को पड़ी सन्नाटे कस्बो मोहल्लों पड़ी निस्तब्धता दुकानों पर पड़ी ताले गलियों पर वीरान पड़ी मंजरे बता रही है कि ये जिंदगी पे आयी कितनी बड़ी विपदा है ये महामारी के बाद आई त्रासदी की तस्वीरें है पर हमने घरों पर बैठने की कर ली अब तैयारी है अब घर पर बैठ कर ही…

  • अब प्रकृति की बारी है

    अब प्रकृति की बारी है

    अब प्रकृति की बारी है ये कोरोना की महामारी है बहुत सहा अन्याय प्रकृति ने अब न्याय की बारी है।चीन, जापान, अमेरिका में भी कोरोना की महामारी है लाखो लोगो की जाने गयी ये कैसी विपदा भारी है। २१ दिन के लॉकडाउन में प्रकृति ने हमे चेताया है अब भी वक्त है, सम्भल जाओ पेड़-पौधे…

  • हौसला

    हौसला

    हौसला रख न ईश्वर को भूल, अच्छे दिन आएगे, करो कबूल. दु:ख भी कटता है और सुख भी कटता है. दिन भी कटता है और रात भी कटती है. पर ईश्वर को तू कभी न भूल, भक्ति में हो जा मशगूल. सिकन्दर भी आये, कलंदर भी आये. न कोई रहा है, न कोई रहेगा. करोना…

  • मसीहा बने डॉक्टर

    मसीहा बने डॉक्टर

    धरती पर आये बन के मसीहा ईश के दूजे रूप में तुम्हे ही चाहा नमन करता “माही” हर उस माँ को अपने बच्चों को डॉक्टर बनाया। डॉक्टर का पेशा भी होता अज़ब मरीज़ को पल में कर देते गज़ब रखते हैं ख़ूब मरीज़ो से भाईचारा दवा के रूप में देते सबको सबब। कोरोनो की महामारी…

  • लॉकडाउन और कोरोना पर अभिव्यक्ति प्रकट कीजिए

    कोरोना • लॉकडाउन • बचाव वेबसाइट के इस विशेष पृष्ठ पर आप अपने विचार और संदेश चंद पंक्तियों (अधिकतम १०० शब्दों) में प्रकट करें। आपके विचार और मत एकत्रित कर हम एक लेख के रूप में प्रस्तुत करेंगें। कलमकारों की अभिव्यक्तियाँ पढ़ें

  • मेरा गेंदे का पौधा

    मेरा गेंदे का पौधा

    हमें अपनी चीज़ों से बहुत लगाव रहता है, कभी-कभी तो हम उनसे बात भी करते हैं। कलमकार मोनिका शर्मा भी अपने द्वारा लगाए गए एक पौधे का जिक्र अपनी कविता में कर रहीं हैं। मेरा गेंदे का पौधा वह मेरा गेंदे का पौधा जिसे बड़े मन से से लगाया रोज सुबह अपनी बालकनी में मिलती…