नया बरस, नया साल

नया साल तो आ गया है, किंतु, क्या आप कुछ भी नया महसूस कर पा रहे हैं? केवल कैलेंडर नया लग रहा है बाकी सब तो पहले जैसा ही है। कलमकार इरफान आब्दी अपनी ओर से मुबारकबाद दे रहे हैं और कुछ बदलाव की कामना कर रहे हैं।

वही सुबह, वही रात, वही दिन, वही साल
वही बात, वही वक़्त, वही चाल, वही हाल

वही आह, वही ज़ुल्म, वही दर्द, वही क़त्ल
वही रोज़, वही शब, वही हिजृ, वही वस्ल

वही शोर, वही ज़ख्म, वही दर्द, कैफ
वहीं तान, वही तंज़, वही डांट, वही हैफ़

वही हर्फ, वही बात, वही लफ़्ज़, वही याद
वही शोर, वही वाह, वही गुंग, वही दाद

वही पहेर, वही कहर, वही दहर, वही लहर
वही अश्क, वही ख़ून, वही दवा, वही ज़हर

वही बाद, वही लू, वही धुवां, वही आग
वही रंज, वही दुःख, वही चोट, वही भाग

वही हुक्म, वही तख्त, वही शाह, वही ताज
वही ज़ुल्म, वही जौर, वही दौर, वही राज

वही वक़्त, वही घड़ी, वही दिन, वही रोज़
वही ग़म, वही दाद, वही साज़, वही सोज़

वही खौफ़, वही डर, वही रोब, वही आह
वही घर, वही अर्ज़, वही ख़ाक, वही राह

वही दाम, वही सैद, मगर मिला नया जाल
बता मुझे, मिला क्या, नया बरस, नया साल?
~ इरफान आब्दी

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
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