नारी की महिमा

कलमकार महेन्द्र परिहार “माही” जी नारी शक्ति के सम्मान में कुछ पंक्तियाँ समर्पित की हैं। महान नारी-शक्तियों को नमन करते हुए आप भी इनकी यह रचना पढें।

साहस त्याग बलिदान की मूरत
विश्वास प्रेम स्वाभिमान की सूरत
तुम हर रंग रूप में ढल जाती
दुनियाँ में तुम छा जाती हो।

शांति दया सहिष्णुता के भाव
जग में रहता हैं तेरा ही प्रभाव
तुम हर दुःख पीड़ा हर जाती
जीवन में खुशियां लाती हो।

उल्लास उमंग उम्मीद की किरण
अन्याय पाप अत्याचार के कारण
तुम काली रूप कर के धारण
धरा अपराध मुक्त कराती हो।

माता बनकर तुमने जन्म दिया
बहन बनके जग में प्यार किया
जीवन साथी बनके आई तुम
दुःख-दर्द में साथ निभाती हो।

मीरा बनके तुमने विषपान किया
राधा बनके हरि संग प्यार किया
तुम गीत सुहाने गा कर के
पल भर में प्रेम सिखाती हो।

~ महेन्द्र परिहार ‘माही’

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