यह कविता उन योद्धओं को समर्पित है जो अघोषित युद्ध लड रहे हैं और कोरोना को मिटाने हेतु कृतसंकल्प हैं।

पूरा देश लड़़ रहा कोरोना से अघोषित युद्ध
देशवासियों मे जोश हैं लडने की भावना है शुद्ध
सारे नागरिक एकजुट हैं कोई नहीं है गुट
देश प्रेम की भावना अत्यंत अद्भुत

इस संकट के समय मे एक विश्वास
आत्मविश्वास और सिर्फ आत्मविश्वास
धीरज ही हमारा है आस
भयानक त्रासदी को हराना हमारा भास (इच्छा)

नागरिकों के हौसले बुलंद हैं
घरों मे सब बंद हैं सवेच्छा से नजरबंद हैं
सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के पाबंद हैं
इस घातक रोग के मिटाने की खाईं एक सौगंध है

चीन से अनचाहा मेहमान है आया
विश्व मे है कोहराम मचाया
विश्व शक्तियों को नाच नचाया
मौत का साया बन कर आया

भारतीयों का इस संकट मे असीम योगदान
कर्मठता ही उनकी पहचान
अपनी जानों का दिया अमूल्य बलिदान
जनमानस के लिये भगवान

राष्ट्र को उबारना उनका काम
डटे रहें सुबह और शाम
सच्ची सेवा भावना निष्काम
भयंकर रोग की कसें लगाम

कोरोना को जड से मिटाना है
डर को.भगाना दूर भगाना है
साफ सफाई को अपनाना है
हर मनुष्य का जीवन बचाना है

सभी कर्मयोद्दायों को मेरा सलाम
देशवासियों को मेरा यह पैगाम

आऔ हम प्रण करें
कोरोना के उन्मूलन हेतू कार्य करें

~ अशोक शर्मा वशिष्ठ

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