कविताएंविशेष दिन मजदूर हम मजदूर HBIADMIN1 मई 2020 कभी छोटू, कभी रामू काका, तो कभी जमुना बाई, तो कभी पसीने से तर-बतर रिक्शा और ठेला खिंचते! कभी ऊँची ऊँची अट्टालिकाआओं पर अपने घरों का तामम भार उठाये! हाँ घर से कोसों दूर, कभी बेघर, तो कभी मजबूर, हाँ सही सूना आपने मजदूर हम मजदूर! ~ अभिषेक अभि
कुदरत का तोहफा 13 मई 2020 कुदरत का तोहफा है कितना लाजवाब।आओ बैठे सोचे,हम मिलकर जनाब।।१।। हरे हरे पेड़ों की,हरी हरी…
माँ तेरा ही एक सहारा है 25 मार्च 2020 हे माँ भगवती अपने लाल को ये वरदान देना। टूटे हौसला जब भी मेरा हाथ…