महीना: मई 2020
मुश्किल में मुस्कान
चारों तरफ हीं अंधियारा है गलियां सब सुनसान मंदिर मस्जिद बंद पड़े हैं कहां जाए…
कौन थी वो?
कलमकार खेमचंद कहते हैं- “कुछ बातें अल्फ़ाज़ों और किताबों में सच्ची लगती है, तुम नादान…
तुम पे लिखूँ ग़ज़ल व गीत
कलमकार लाल देवेन्द्र श्रीवास्तव लिखतें हैं कि अपने साथी/मीत पर तो अनेकों गजल और कविताएं…
याद तुम्हें कर रो लेता हूँ
कुछ पुरानी चीजों से बहुत गहरी यादें जुड़ी होती हैं और वे ओझल हो चुके…
पलायन करते मजदूर
कितना कुछ कहते रहे, मजदूरों के पाँव। तपती जीवन रेत में, कहाँ मिली है छाँव।।…
