महीना: मई 2020
कोरोना कह रहा
कोरोना कह रहा-मरो ना, विकास की अंधी रफ्तार के आगे, कहां सोच पाया था इंसान…
हिम्मत कायम हो
आपस में अगर अपना जिन्दा होना है कोरोना के माहौल में हिम्मत कायम हो भरोसा…
एक मजदूर की कहानी
आधी रोटी भी नहीं नसीब जिस इन्सान को उसका नाम मजदूर है। शायद, इसलिए ठूस…
मेरी मजबूरी रोटी
कुलबुलाती है, भूख बिलबिलाती है। ठंडी रातों में भी जेठ सी जलाती हैं। अपनी मजबूरी…
भारत माँ के तारे
देखा नही खुदा कही घूमा मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे पता ना था वो पास है मेरे…
लॉकडाउन और मजदूर
किसी भी आपदा, महामारी का सबसे ज्यादा प्रभाव कमज़ोर और गरीब वर्ग पर ही होता…
