कविताएंपहली पोस्टविशेष दिन मज़दूर है बहुत मजबूर HBIADMIN1 मई 2020 समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है ये जिसे हम मज़दूर शब्द से नवाज़ते है, कई… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर दिवस नहीं मजबूर दिवस HBIADMIN1 मई 2020 जिस दिन भारत की यह तस्वीर बदल जाएगी सच उस दिन देश की तकदीर बदल… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर बना मजबूर HBIADMIN1 मई 2020 मजदूर बना मजबूर हां मजदूर हूं मै। बेबस और मजबूर हूं मै।। काम देखकर स्वप्न… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर हम मजदूर HBIADMIN1 मई 2020 कभी छोटू, कभी रामू काका, तो कभी जमुना बाई, तो कभी पसीने से तर-बतर रिक्शा… Read More
कविताएंविशेष दिन लाल हरी चूड़ियां HBIADMIN1 मई 2020 यहां की प्रत्येक महिला को साहब, बहुत भाती हैं ये लाल हरी चूड़ियां ! श्रृंगार… Read More
कविताएंविशेष दिन मेहनतकश मजदूर हूँ HBIADMIN1 मई 2020 मैं मेहनत कश मजदूर हूँ हालातों से थोड़ा मजबूर हूँ खून पसीना एक करता हूँ… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर का दर्द HBIADMIN1 मई 2020 पूरा विश्व परेशान तो इस नोबल कोरोना रूपी महामारी से भी है, लेकिन बच्चो एवं… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर का जीवन HBIADMIN1 मई 2020 किसी भी बोझ से न थकता हूं वक्त की चोट से न रुकता हूं बस… Read More
कविताएंविशेष दिन मजदूर HBIADMIN1 मई 2020 कभी इंटे उठाता। कभी तसले, मिट्टी के भर-भर ले जाता। पीठ पर लादकर, भारी बोझे,… Read More
कविताएंविशेष दिन मैं मजदूर हूँ HBIADMIN1 मई 2020 हाँ, मैं मजदूर हूँ, बेबश हूँ, लाचार हूँ, बुझाने भूख पेट की, गालियाँ खाता, सिसकता… Read More